आरती बोलने का सही तरीका और महत्व:
भगवान विष्णु की आरती श्रद्धा, भक्ति और ध्यान से गाई जाती है। इसे गाने का सही तरीका है कि भक्त पूरे मनोयोग से भगवान के समक्ष शांत चित्त होकर आरती करें। आरती के माध्यम से भगवान विष्णु की कृपा और संरक्षण प्राप्त होता है। यह हमारे जीवन में सुख-शांति और समृद्धि का संचार करती है। आरती से मानसिक शांति, आंतरिक बल और समस्याओं का समाधान प्राप्त होता है।
ॐ जय जगदीश हरे
ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे।
भक्त जनों के संकट, दास जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥
ॐ जय जगदीश हरे…
जो ध्यावे फल पावे, दुःख बिनसे मन का।
स्वामी दुःख बिनसे मन का, सुख संपत्ति घर आवे॥
ॐ जय जगदीश हरे…
मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूं मैं किसकी।
स्वामी शरण गहूं मैं किसकी, तुम बिन और न दूजा॥
ॐ जय जगदीश हरे…
तुम हो एक अगोचर, सब के प्राणपति।
स्वामी सब के प्राणपति, कष्टनाशक, सुखदाता॥
ॐ जय जगदीश हरे…
जो ध्यान लगाए कोई, मनवांछित फल पाए।
स्वामी मनवांछित फल पाए, सुख संपत्ति घर आए॥
ॐ जय जगदीश हरे…
समापन प्रक्रिया:
आरती के बाद घी के दीपक के साथ भगवान की आरती उतारें। फिर भगवान विष्णु के चरणों में फूल अर्पित करें, घंटी बजाएँ और प्रसाद वितरित करें। सभी भक्तों को प्रसाद देकर अंत में भगवान को नमन करें और शांति से वहां से विदा लें।
