आरती बोलने का सही तरीका और महत्व:
भगवान शंकर की आरती को शुद्ध हृदय से, भक्तिभाव से गाया जाता है। इसे गाने के दौरान शुद्ध स्वर, सही उच्चारण, और उचित लय का पालन करना चाहिए। आरती का महत्व है भगवान शिव की कृपा प्राप्त करना और जीवन के कष्टों का निवारण करना। आरती से व्यक्ति को शांति, सद्भावना और मानसिक शुद्धि मिलती है।
ॐ जय शिव ओंकारा
ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा॥
ॐ जय शिव ओंकारा…
एकानन चतुरानन पंचानन राजे,
हंसासन गरूड़ासन वृषवाहन साजे॥
ॐ जय शिव ओंकारा…
दो भुज चार चतुर्भुज दस भुजा अति सोहे,
त्रिगुण रूप निरखत त्रिभुवन जन मोहे॥
ॐ जय शिव ओंकारा…
अक्ष माला बनमाला रुण्डमाला धारी,
त्रिपुरारी कंठी माला जगवंदनकारी॥
ॐ जय शिव ओंकारा…
श्वेतांबर पीतांबर बाघंबर अंगे,
संकादी मुनि सेवत नर नारी नंगे॥
ॐ जय शिव ओंकारा…
कर के मध्य कमंडलु चक्र त्रिशूलधारी,
सुखकारी दुखहारी त्रिभुवन हितकारी॥
ॐ जय शिव ओंकारा…
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका,
प्रणवाक्षर के मध्य यह त्रिविधि एका॥
ॐ जय शिव ओंकारा…
समापन प्रक्रिया:
आरती के समापन के बाद घंटी बजाई जाती है, भगवान के चरणों में पुष्प अर्पित किए जाते हैं, और सभी भक्त प्रसाद ग्रहण करते हैं। तत्पश्चात, ध्यानपूर्वक भगवान से आशीर्वाद लेकर नमन करें और शांति से वहां से विदा लें।
